आकाशवाणी कोटा और आज का दिन
आज क्षमाजी की कहानी की रिकार्डिग के लिए आकाशवाणी कोटा जाना पड़ गया। वहॉं सदाबहार कवि दयाकृष्ण विजय के साथ हुई मुलाकात यादगार बन गर्इ्र। छयासी वर्षीय विजय जी आज भी उतने ही युवा लगे , जब वे कवि गोष्ठियों में मुखरित हुआ करते थे। कह रहे थे , अपनी पचासी वर्षगांठ मनाना भूल गया, इमारी प्रार्थना थी वे धूमधाम से मनाएॅं, जब नब्बे की होगी , सारे साहित्यकार मिल कर मनाएॅंगे। वे जल्दी ही शुभ सूचना देंगे। उनकी कविताओ का प्रसारण 26 जनवरी को होगा , आप उनकी ओजस्वी कतिाओं को सुनें।
क्षमा की कहानी चक्रव्यूह 14 जनवरी मकर संक्रांति को सुबह 8.45 पर साहित्यिक कार्यक्रम में आरही हे। आप सुनें, यही आग्रह हे। आकाशवाणी कोटा से कुछ माह पूर्व मेरी एक वार्ता आई थी। वार्ता के बाद ही अनेक मित्रों के फोन आगए, मैं चमत्कृत था, सचमुच कोटा का आकाशवाणी केन्द्र और उसके साहित्यिक कार्यक्रम , इस अंचल में सांस्कृतिक गतिविधियों के केन्द्र बन गए हैं। आकाशवाणी केन्द्र से पिछले कुछ दिनो में शरद तैलंग, आर.सी शर्मा की कविताओं को सुना, इंद्रबिहारी जी को सुना, वास्तव में बहुत कुछ साहित्यिक सरोकारों से यह जुड़ाव अच्छा लगने लगा हें
क्षमाजी की कहानी चक्रव्यूह का एक अंश है-
और यही सब सोचकर वह यहां आया था। मां ने तो सोचा कि बेटा अब अपनी पुरानी यादों से उबर गया है तो उन्होंने फिर लंबी लिस्ट लड़कियों की उसे थमा दी। पर वह कैसे कहता कि मैंने मुम्बई में ही एक लड़की पसंद कर ली है, वह विधवा है, उसके एक बेटा भी है। मां, बाबूजी कैसे इस सबकी इजाजत देते।
वह चाहकर भी कुछ कह नहीं पाया। कई बार अपने मन को तैयार किया पर मां का चेहरा देखते ही चुप हो जाता।
अब लगा जैसे एक चक्रव्यूह में वह घिरता जा रहा है, तेज सरदी में भी माथे पर पसीने की बूंदे आ गई थी।
नहीं, उसे तो इस व्यूह को तोड़ना ही है। फिर से सोनू और जूही के चेहरे सामने आ गए थे। हां, बहुत सोच समझकर ही वह निर्णय ले रहा है। जूही के साथ एक खुशहाल जिंदगी जी सकेगा वह। और फिर... उसे खुश देखकर मां, बाबूजी भी क्या खुश नहीं होंगे। आखिर बेटे की खुशी ही तो चाहते हैं मां, बाप।
एकाएक उसके विचारों को विराम लग गया था-
गाड़ी अभी भी अपनी अबाध गति से दौड़ रही थी, ।
,आप कहानी चक्रव्यूह को कल सुबह मकर संक्रांति पर 8.45 के साहित्यिक कार्यक्रम में, सुने अपनी प्रतिक्रिया दें।